भगवान शिव को जो पत्र पुष्प प्रिय है , उनमे बिल्बपत्र का स्थान शीर्ष पर है | श्रवण मॉस में बिल्बपत्र को शिव पर अर्पित करने से धन सम्पदा , ऐश्वर्य प्राप्त हो जाता है| बिल्ब पत्र को श्री वृक्ष भी माना जाता है | ऋग्वेदोक्त , श्री सूक्त के अनुसार माँ लक्ष्मी के तपोबल से बिल्बव्रक्ष उत्पन्न हुआ , जो दरिद्रता को भी दूर करने में समर्थ है | यह लक्ष्मी प्रदाता है |
शिव स्वरूप है बिल्ब पत्र : -
शिवपुराण की विधेश्वसंहिता के अनुसार बिल्ब पत्र महादेव का ही रूप है तीनो लोको में जितने पुण्य तीर्थ है , वे बिल्ब वृक्ष के मूल भाग में निवास करते है | जो मनुष्य बिल्ब के मूल में शिवलिंग की पूजा करते है वह शिवपद को प्राप्त करते है | जो मनुष्य बिल्ब पत्र की जड़ के पास जल से मस्तक को सींचता है वो सम्पूर्ण तीर्थो के स्नान का फल प्राप्त कर लेता है | जो मनुष्य गंध पुष्प आदि से बिल्ब के मूल भाग का पूजन करता है , उसका सुख और संपत्ति दोनों बढते है | जो मनुष्य बिल्ब की जड़ के पास शिव भक्त को खीर और घृत से युक्त भोजन करता है वह कभी दरिद्र नहीं होता है , साथ ही उसे कोटि गुना पुण्य प्राप्त होता है | शिव को अत्यंत प्रिय बिल्ब पत्र से की गयी शिव पूजा जन्म जन्मान्तर के पापो का नाश करने वाली है | कई जन्मो का दरिद्र भी इसके प्रभाव से धन सम्पदा प्राप्त करता है |
महत्त्व :-
शिव पूजा करते समय शिवलिंग से दक्षिण दिशा में उत्तराभिमुख होकर बैठना चाहिए | पंचाक्षरी मंत्र ॐ नम: शिवाय के साथ पंचामृत द्वारा शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए | फिर दूध , दही शक्कर घृत व् शहद से शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए | फिर शिव को वरुण स्नान कराए एवं इत्र और चन्दन का लेप करे | पुन : लिंग पर सुगन्धित जल धारा गिरा कर अभिषेक करे | और स्वच्छ स्वेत वस्त्र से अच्छी तरह पोछे | पुन : आचमनार्थ जल दे | और जानेउ वस्त्र व् नेवेध्य समर्पित करे | इसके बाद शिवलिंग पर कमल , शत पत्र , शंखपुष्प , धतुरा , आक और बिल्बपत्र चड़ाए| पुष्पों के आभाव में बिल्बपत्र हो ने मात्र से ही शिव की पूजा सिद्ध हो जाती है | एक बिल्बपत्र में तीन पत्ते होते है , तीन पत्ते होने पर ही बिल्ब पत्र चडाना चाहिए अन्यथा नहीं | बिल्ब पत्र को शिवलिंग पर उल्टा चडाना चाहिए | एक एक बिल्ब पत्र को चडाते समय बिल्बाषटक का उच्चारण करते हुए बिल्ब पत्र चडाना चाहिए | श्रवण मास में एक सहस्त्र बिल्ब पत्र चडाने से समस्त मनोकामनाए पूर्ण हो जाती है |
बिल्ब पत्र की जानकारी : -
प्राय : पेड़ पर बिल्बपत्र तीन पत्तो वाला होता है | हालाँकि एसा देखा गया है की बिल्ब पत्र चार , पञ्च व् छ पत्रों वाला भी होता है ऐसे पत्र प्राय दुर्लभ ही होते है ऐसे दुलभ पत्रों की प्राप्ति को अपना सोभाग्य मानना चाहिए एवं इसे तस्वीर की तरह फ्रेम करवाकर पूजा कक्ष में रखना चाहिए | तीन पत्र वाला बिल्ब पत्र ब्रम्हा , विष्णु , महेश का संयुक्त स्वरूप है | ॐ शिव ओमकारा वाला यही पत्र शिवलिंग पर चड़ता है | चार पत्तो वाला बिल्ब पत्र ब्रम्हा का प्रतीक है | पञ्च मुख वाला बिल्ब पत्र साक्षात् शिव रूप है | और मनोवांछित फल देने वाला है | एवं छ पत्रों वाला बिल्ब पत्र कार्तिकेय का स्वरूप है |
लगाए बिल्बपत्र :-
पुरानो में कहा है की जहा पर तुलसी और बिल्ब के वृक्ष हो , वहा कशी स्वयं होती है | वृक्षायुर्वेद में कहा है की यदि कोई व्यक्ति अपने घरः में बिल्ब पत्र का वृक्ष लगता है तो वह शिव का सानिध्य प्राप्त करता है | और वैभव की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी वहा स्थायी रूप से निवास करती है | वहा पुत्र , पोत्रादी की निरंतर वृद्धि होती है |
वामन पुराण में बिल्ब में लक्ष्मी का निवास कहा गया है | भविष्य पुराण में कहा गया है की देवासुर संग्राम में लक्ष्मी ने कुछ देर के लिए विश्राम किया था इसीलिए इसे श्री वृक्ष भी कहा गया है | और इसकी पूजा के लिए यह मन्त्र दिया गया है - श्री निवास नमस्तेस्तु श्री वृक्ष शिवा वल्लभ : ममभिलाक्षित कृत्वा सर्व विघ्रहरोभव् | इसी पुराण में गोमय से बिल्ब की उत्पत्ति बताई गयी है और उसमे लक्ष्मी का निवास कहा गया है |
शिव स्वरूप है बिल्ब पत्र : -
शिवपुराण की विधेश्वसंहिता के अनुसार बिल्ब पत्र महादेव का ही रूप है तीनो लोको में जितने पुण्य तीर्थ है , वे बिल्ब वृक्ष के मूल भाग में निवास करते है | जो मनुष्य बिल्ब के मूल में शिवलिंग की पूजा करते है वह शिवपद को प्राप्त करते है | जो मनुष्य बिल्ब पत्र की जड़ के पास जल से मस्तक को सींचता है वो सम्पूर्ण तीर्थो के स्नान का फल प्राप्त कर लेता है | जो मनुष्य गंध पुष्प आदि से बिल्ब के मूल भाग का पूजन करता है , उसका सुख और संपत्ति दोनों बढते है | जो मनुष्य बिल्ब की जड़ के पास शिव भक्त को खीर और घृत से युक्त भोजन करता है वह कभी दरिद्र नहीं होता है , साथ ही उसे कोटि गुना पुण्य प्राप्त होता है | शिव को अत्यंत प्रिय बिल्ब पत्र से की गयी शिव पूजा जन्म जन्मान्तर के पापो का नाश करने वाली है | कई जन्मो का दरिद्र भी इसके प्रभाव से धन सम्पदा प्राप्त करता है |
महत्त्व :-
शिव पूजा करते समय शिवलिंग से दक्षिण दिशा में उत्तराभिमुख होकर बैठना चाहिए | पंचाक्षरी मंत्र ॐ नम: शिवाय के साथ पंचामृत द्वारा शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए | फिर दूध , दही शक्कर घृत व् शहद से शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए | फिर शिव को वरुण स्नान कराए एवं इत्र और चन्दन का लेप करे | पुन : लिंग पर सुगन्धित जल धारा गिरा कर अभिषेक करे | और स्वच्छ स्वेत वस्त्र से अच्छी तरह पोछे | पुन : आचमनार्थ जल दे | और जानेउ वस्त्र व् नेवेध्य समर्पित करे | इसके बाद शिवलिंग पर कमल , शत पत्र , शंखपुष्प , धतुरा , आक और बिल्बपत्र चड़ाए| पुष्पों के आभाव में बिल्बपत्र हो ने मात्र से ही शिव की पूजा सिद्ध हो जाती है | एक बिल्बपत्र में तीन पत्ते होते है , तीन पत्ते होने पर ही बिल्ब पत्र चडाना चाहिए अन्यथा नहीं | बिल्ब पत्र को शिवलिंग पर उल्टा चडाना चाहिए | एक एक बिल्ब पत्र को चडाते समय बिल्बाषटक का उच्चारण करते हुए बिल्ब पत्र चडाना चाहिए | श्रवण मास में एक सहस्त्र बिल्ब पत्र चडाने से समस्त मनोकामनाए पूर्ण हो जाती है |
बिल्ब पत्र की जानकारी : -
प्राय : पेड़ पर बिल्बपत्र तीन पत्तो वाला होता है | हालाँकि एसा देखा गया है की बिल्ब पत्र चार , पञ्च व् छ पत्रों वाला भी होता है ऐसे पत्र प्राय दुर्लभ ही होते है ऐसे दुलभ पत्रों की प्राप्ति को अपना सोभाग्य मानना चाहिए एवं इसे तस्वीर की तरह फ्रेम करवाकर पूजा कक्ष में रखना चाहिए | तीन पत्र वाला बिल्ब पत्र ब्रम्हा , विष्णु , महेश का संयुक्त स्वरूप है | ॐ शिव ओमकारा वाला यही पत्र शिवलिंग पर चड़ता है | चार पत्तो वाला बिल्ब पत्र ब्रम्हा का प्रतीक है | पञ्च मुख वाला बिल्ब पत्र साक्षात् शिव रूप है | और मनोवांछित फल देने वाला है | एवं छ पत्रों वाला बिल्ब पत्र कार्तिकेय का स्वरूप है |
लगाए बिल्बपत्र :-
पुरानो में कहा है की जहा पर तुलसी और बिल्ब के वृक्ष हो , वहा कशी स्वयं होती है | वृक्षायुर्वेद में कहा है की यदि कोई व्यक्ति अपने घरः में बिल्ब पत्र का वृक्ष लगता है तो वह शिव का सानिध्य प्राप्त करता है | और वैभव की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी वहा स्थायी रूप से निवास करती है | वहा पुत्र , पोत्रादी की निरंतर वृद्धि होती है |
वामन पुराण में बिल्ब में लक्ष्मी का निवास कहा गया है | भविष्य पुराण में कहा गया है की देवासुर संग्राम में लक्ष्मी ने कुछ देर के लिए विश्राम किया था इसीलिए इसे श्री वृक्ष भी कहा गया है | और इसकी पूजा के लिए यह मन्त्र दिया गया है - श्री निवास नमस्तेस्तु श्री वृक्ष शिवा वल्लभ : ममभिलाक्षित कृत्वा सर्व विघ्रहरोभव् | इसी पुराण में गोमय से बिल्ब की उत्पत्ति बताई गयी है और उसमे लक्ष्मी का निवास कहा गया है |
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